✝️ बाइबल के अनुसार विवाह – एक गहन अध्ययन 1. विवाह की उत्पत्ति – परमेश्वर की योजना विवाह कोई मनुष्य की बनाई प्रथा नहीं, बल्कि परमेश्वर की पहली व्यवस्था है। उत्पत्ति 2:18 – “मनुष्य का अकेला रहना अच्छा नहीं; मैं उसके लिये एक ऐसा सहायक बनाऊँगा जो उसके योग्य हो।” उत्पत्ति 2:24 – “इस कारण पुरुष अपने माता-पिता को छोड़कर अपनी पत्नी से मिला रहेगा, और वे एक तन होंगे।” 👉 विवाह एक पवित्र वाचा (Sacred Covenant) है, जिसमें पति और पत्नी परमेश्वर के सामने एक हो जाते हैं। 2. विवाह की पवित्रता विवाह को परमेश्वर ने पवित्र ठहराया है। इब्रानियों 13:4 – “सब में विवाह आदरणीय समझा जाए, और विवाह-शैया निर्मल रहे; क्योंकि परमेश्वर व्यभिचारियों और व्यभिचारिणियों का न्याय करेगा।” 👉 विवाह शारीरिक सुख या सामाजिक प्रतिष्ठा के लिये नहीं, बल्कि पवित्रता और आत्मिक आशीष के लिये है। 3. विश्वास में समानता का महत्व 2 कुरिन्थियों 6:14 – “अविश्वासियों के साथ असमान जुए में न जुते; क्योंकि धर्म और अधर्म में क्या सहभागिता है? या ज्योति और अन्धकार में क्या मेल है?” आमोस 3:3 – “क्या दो व्यक्ति बिना आपस में सहमत हुए एक साथ च...
◆: चुनाव के विषय एक विचार :◆ कभी कभी हम उत्साहित होते हैं कि अगर हमको प्रभु यीशु ने चुना है तो हम पाक हैं निर्दोष हैं! क्योंकि हम इस वचन को देखते हैं कि लिखा है लिखा है तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैंने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जाकर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से माँगो, वह तुम्हें दे। यूहन्ना 15:16” इस वचन हम अपने आप को महान समझने लगे जातें हैं । और इस बात पे चर्चा करते है कि “ हम बुलाये हुए नही ; पर चुने हुवे हैं” पर आज के इस विचार से हम चौक सकते हैं । क्योंकि चुनाव के विषय मे यूहन्ना 6:70 में यीशु मसीह ने कुछ इस प्रकार कहा *यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, क्या मैंने तुम बारहों को नहीं चुन लिया? तो भी तुम में से एक व्यक्ति शैतान है। * यह उसने शमौन इस्करियोती के पुत्र यहूदा के विषय में कहा, क्योंकि यही जो उन बारहों में से था, उसे पकड़वाने को था। आखरी बात तो ये है कि चाहे जो कोई क्यों ना हो, अगर उस के साथ बना नही रहेगा, पर अपने अनुसार चलेगा, वह काटा और आग में झोंका जाएगा, उसने आपही कहा " जो डाली मुझ में है, ...
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