चुनाव के विषय एक विचार
◆: चुनाव के विषय एक विचार :◆
कभी कभी हम उत्साहित होते हैं कि अगर हमको प्रभु यीशु ने चुना है तो हम पाक हैं निर्दोष हैं! क्योंकि हम इस वचन को देखते हैं कि लिखा है लिखा है
तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैंने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जाकर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से माँगो, वह तुम्हें दे। यूहन्ना 15:16” इस वचन हम अपने आप को महान समझने लगे जातें हैं । और इस बात पे चर्चा करते है कि “हम बुलाये हुए नही ; पर चुने हुवे हैं” पर आज के इस विचार से हम चौक सकते हैं ।
क्योंकि चुनाव के विषय मे यूहन्ना 6:70 में यीशु मसीह ने कुछ इस प्रकार कहा *यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, क्या मैंने तुम बारहों को नहीं चुन लिया? तो भी तुम में से एक व्यक्ति शैतान है।* यह उसने शमौन इस्करियोती के पुत्र यहूदा के विषय में कहा, क्योंकि यही जो उन बारहों में से था, उसे पकड़वाने को था।
आखरी बात तो ये है कि चाहे जो कोई क्यों ना हो, अगर उस के साथ बना नही रहेगा, पर अपने अनुसार चलेगा, वह काटा और आग में झोंका जाएगा, उसने आपही कहा " जो डाली मुझ में है, और नहीं फलती, उसे वह काट डालता है, और जो फलती है, उसे वह छाँटता है ताकि और फले। तुम तो उस वचन के कारण जो मैंने तुम से कहा है, शुद्ध हो। तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते। मैं दाखलता हूँ: तुम डालियाँ हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उसमें, वह बहुत फल फलता है, क्योंकिमुझसे अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते। यदि कोई मुझ में बना न रहे, तो वह डाली के समान फेंक दिया जाता, और सूख जाता है; और लोग उन्हें बटोरकर आग में झोंक देते हैं, और वे जल जाती हैं।
यूहन्ना 15:2-6 |
तो इस कारण आनन्दित हो और प्रभु में बने रहो ! और सावधानी बरतने में कसर ना छोड़ो । प्रभु आप को आशिष दे ।। अमीन ।

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