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चुनाव के विषय एक विचार

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 ◆: चुनाव के विषय एक विचार :◆ कभी कभी हम उत्साहित होते हैं कि अगर हमको प्रभु यीशु ने चुना है तो हम पाक हैं निर्दोष हैं! क्योंकि हम इस वचन को देखते हैं कि लिखा है लिखा है  तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैंने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जाकर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से माँगो, वह तुम्हें दे। यूहन्ना 15:16” इस वचन हम अपने आप को महान समझने लगे जातें हैं । और इस बात पे चर्चा करते है कि “ हम बुलाये हुए नही ; पर चुने हुवे हैं” पर आज के इस विचार से हम चौक सकते हैं । क्योंकि चुनाव के विषय मे यूहन्ना 6:70 में यीशु मसीह ने कुछ इस प्रकार कहा  *यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, क्या मैंने तुम बारहों को नहीं चुन लिया? तो भी तुम में से एक व्यक्ति शैतान है। *  यह उसने शमौन इस्करियोती के पुत्र यहूदा के विषय में कहा, क्योंकि यही जो उन बारहों में से था, उसे पकड़वाने को था।  आखरी बात तो ये है कि चाहे जो कोई क्यों ना हो, अगर उस के साथ बना नही रहेगा, पर अपने अनुसार चलेगा, वह काटा और आग में झोंका जाएगा, उसने आपही कहा " जो डाली मुझ में है, ...

✝️ बाइबल के अनुसार विवाह – एक गहन अध्ययन

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 ✝️ बाइबल के अनुसार विवाह – एक गहन अध्ययन 1. विवाह की उत्पत्ति – परमेश्वर की योजना विवाह कोई मनुष्य की बनाई प्रथा नहीं, बल्कि परमेश्वर की पहली व्यवस्था है। उत्पत्ति 2:18 – “मनुष्य का अकेला रहना अच्छा नहीं; मैं उसके लिये एक ऐसा सहायक बनाऊँगा जो उसके योग्य हो।” उत्पत्ति 2:24 – “इस कारण पुरुष अपने माता-पिता को छोड़कर अपनी पत्नी से मिला रहेगा, और वे एक तन होंगे।” 👉 विवाह एक पवित्र वाचा (Sacred Covenant) है, जिसमें पति और पत्नी परमेश्वर के सामने एक हो जाते हैं। 2. विवाह की पवित्रता विवाह को परमेश्वर ने पवित्र ठहराया है। इब्रानियों 13:4 – “सब में विवाह आदरणीय समझा जाए, और विवाह-शैया निर्मल रहे; क्योंकि परमेश्वर व्यभिचारियों और व्यभिचारिणियों का न्याय करेगा।” 👉 विवाह शारीरिक सुख या सामाजिक प्रतिष्ठा के लिये नहीं, बल्कि पवित्रता और आत्मिक आशीष के लिये है। 3. विश्वास में समानता का महत्व 2 कुरिन्थियों 6:14 – “अविश्वासियों के साथ असमान जुए में न जुते; क्योंकि धर्म और अधर्म में क्या सहभागिता है? या ज्योति और अन्धकार में क्या मेल है?” आमोस 3:3 – “क्या दो व्यक्ति बिना आपस में सहमत हुए एक साथ च...

इपिफनियास पर्व

  इपिफनियास पर्व का गहन अध्ययन आधारशास्त्र: 1 यूहन्ना 3:1-6 और मत्ती 2:1-12 परिचय "इपिफनियास" शब्द यूनानी भाषा के "Epiphaneia" से लिया गया है, जिसका अर्थ है "प्रकाशित होना" या "प्रकट होना।" यह पर्व मुख्य रूप से यीशु मसीह के "संसार के उद्धारकर्ता" के रूप में प्रकट होने का प्रतीक है। इसे "तीन राजाओं का दिन" भी कहा जाता है क्योंकि यह मगी (तीन ज्योतिषियों) द्वारा यीशु की आराधना करने और उपहार चढ़ाने की घटना से जुड़ा है। 1. ईश्वर का महान प्रेम (1 यूहन्ना 3:1-3) यह पद हमें यह प्रकट करता है कि ईश्वर का प्रेम कितना महान है। उसने हमें न केवल अपने प्राणी के रूप में बनाया, बल्कि अपने बच्चे बनने का अधिकार भी दिया। "पिता ने हमसे कितना प्रेम किया है कि हम परमेश्वर के पुत्र कहलाएं।" यह प्रेम केवल एक भावना नहीं, बल्कि एक अनुग्रह है, जो हमें परमेश्वर के साथ संबंध में लाता है। परमेश्वर के बच्चों की पहचान परमेश्वर के बच्चे होने का अर्थ है: ●संसार में अलग जीवन जीना। ●पवित्रता में बढ़ना। ●मसीह के समान बनना। मसीह का प्रकटीकरण यीशु का पृथ्व...

क्योंकि प्रभु आत्मा है, और जहाँ कहीं प्रभु का आत्मा है वहाँ स्वतंत्रता है।

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क्योंकि प्रभु आत्मा है, और जहाँ कहीं प्रभु का आत्मा है वहाँ स्वतंत्रता है।  2 कुरिन्थियों 3:17 में लिखा है: "क्योंकि प्रभु आत्मा है, और जहाँ कहीं प्रभु का आत्मा है वहाँ स्वतंत्रता है।" यह वचन गहराई से परमेश्वर के आत्मा और स्वतंत्रता के विषय में हमारे लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। आइए इस पर विस्तार से अध्ययन करें। 1. प्रभु का आत्मा यह वचन यह स्पष्ट करता है कि प्रभु स्वयं आत्मा हैं। यह आत्मा केवल कोई शक्ति या ऊर्जा नहीं है, बल्कि परमेश्वर की एक जीवित उपस्थिति है। यह आत्मा हमें निर्देशित करती है, सिखाती है, और हमें परमेश्वर की इच्छा के अनुसार जीवन जीने में सक्षम बनाती है। आत्मा का कार्य: आत्मा हमें सच्चाई की ओर ले जाती है (यूहन्ना 16:13)। आत्मा हमें सांत्वना और सहायता देती है (यूहन्ना 14:26)। आत्मा पाप के प्रति हमारे दिलों को सचेत करती है (यूहन्ना 16:8)। 2. स्वतंत्रता का अर्थ जहाँ परमेश्वर का आत्मा है, वहाँ स्वतंत्रता है। इस स्वतंत्रता का अर्थ केवल बाहरी दासता से मुक्ति नहीं है, बल्कि यह पाप, धार्मिकता के आडंबर, और पुराने नियम के कानूनों के बंधनों से छुटकारा है। पुराना और नया...

संकरे और चौड़े द्वार का संदेश

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  संकरे और चौड़े द्वार का संदेश मत्ती 7:13 – संकरे और चौड़े द्वार का संदेश वचन: "संकरी द्वार से प्रवेश करो। क्योंकि चौड़ा है वह द्वार और बड़ा है वह मार्ग जो विनाश की ओर ले जाता है, और बहुत से लोग उस पर से जाते हैं।" (मत्ती 7:13 परिचय यीशु मसीह ने पहाड़ी उपदेश (सर्मन ऑन द माउंट) में मत्ती 7:13 के माध्यम से एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। यह वचन जीवन के दो द्वारों का उल्लेख करता है—एक जो विनाश की ओर ले जाता है और दूसरा जो जीवन की ओर। यह हमें अपने जीवन के चुनावों पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है। 1. चौड़ा द्वार और बड़ा मार्ग चौड़ा द्वार और बड़ा मार्ग सांसारिक जीवन के आसान और सुखद रास्ते को दर्शाते हैं। यह आकर्षक और सरल प्रतीत हो सकता है, लेकिन इसका अंत विनाश है। यह मार्ग उन लोगों के लिए है जो परमेश्वर के प्रति उत्तरदायी नहीं रहना चाहते। यह सांसारिक इच्छाओं, भोग और पाप का प्रतीक है। यह मार्ग केवल क्षणिक आनंद देता है, लेकिन यह परमेश्वर से अनंत पृथक्करण की ओर ले जाता है। 2. संकरा द्वार और कठिन मार्ग संकरे द्वार का मार्ग कठिन है, लेकिन यह अनंत जीवन की ओर ले जाता है। इस मार्ग पर चलने क...

Sleeping নিন্দ্ৰা नींद

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  Study About Sleeping बाइबल अध्ययन: नीतिवचन 20:13 " नींद से प्रेम मत कर, ऐसा न हो कि तू कंगाल हो जाए; अपनी आँखें खोल, और तू अन्न से तृप्त होगा।" हिंदी में अध्ययन: यह पद हमें आलस्य और नींद से बचने की सलाह देता है। इसका मुख्य उद्देश्य हमें चेताना है कि आलस्य और अनावश्यक नींद गरीबी और असफलता की ओर ले जाती है। परमेश्वर चाहता है कि हम अपने समय और संसाधनों का सही उपयोग करें। नींद आवश्यक है, लेकिन इसका अतिरेक हमारे जीवन को नुकसान पहुंचा सकता है। जब हम सतर्क और परिश्रमी रहते हैं, तब हम अपने जीवन में आशीष और समृद्धि का अनुभव करते हैं। यह पद हमें सक्रिय और जिम्मेदार होने के लिए प्रेरित करता है। आध्यात्मिक दृष्टिकोण: आध्यात्मिक रूप से यह पद हमें आत्मिक जागरूकता का महत्व भी सिखाता है। हमें अपनी आत्मा को निष्क्रियता से बचाकर परमेश्वर के वचनों और उसके कार्यों के प्रति जागरूक रहना चाहिए। English Translation and Study: Proverbs 20:13 " Do not love sleep, lest you come to poverty; open your eyes, and you will be satisfied with bread." Study in English: This verse advises us to avoi...

New Year Massege 2025

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  New Year Massege  प्रिय भाईयों और बहनों, नववर्ष की इस पवित्र सुबह में, मैं आप सभी को प्रभु यीशु मसीह के नाम से शुभकामनाएं देता हूं। आज हम बाइबल के एक गहरे और शक्तिशाली वचन पर मनन करेंगे।   प्रकाशित वाक्य 21:5 में लिखा है: *“और जो सिंहासन पर बैठा था, उसने कहा, ‘देख, मैं सब कुछ नया कर देता हूं।’ फिर उसने कहा, ‘इन वचनों को लिख ले, क्योंकि ये विश्वासयोग्य और सच्चे हैं।’”* यह वचन केवल शब्द नहीं हैं; यह परमेश्वर की ओर से हमारे लिए एक वादा और जीवन की दिशा देने वाला संदेश है। आइए इसे शारीरिक और आत्मिक जीवन के संदर्भ में गहराई से समझें। * 1. शारीरिक जीवन में नवीनीकरण* हमारी देह परमेश्वर का मंदिर है (1 कुरिन्थियों 6:19)। अक्सर, हम अपने शरीर के प्रति लापरवाह हो जाते हैं—अस्वस्थ जीवनशैली, आलस्य, या गलत आदतें हमें कमजोर बना देती हैं। लेकिन इस वचन में परमेश्वर हमें याद दिलाते हैं कि वह हमारे शारीरिक जीवन को भी नया कर सकते हैं। नए साल का यह समय हमें प्रेरित करता है कि हम अपने शरीर को उनकी महिमा के लिए उपयोग करें। स्वस्थ आहार, अनुशासित जीवनशैली, और काम के साथ आराम का संतुलन स्थापित करन...